Saturday, 8 December 2012

Ruk Jao Na...


हसरतें हैं
हरकतें हैं
तुम्हारी आहट है
पुरानी चाहत है
रुक जाओ  
रुक भी जाओ  
रुक जाओ  
                 
थोड़ी ख़ामोशी
ये मदहोशी
कुछ तो आदत है
एक पुरानी चाहत है
रुक जाओ ,
रुक भी जाओ
रुक जाओ  

कुछ गुमसुम थी तुम
कुछ गुमशुदा ये दिल
फिर यूँ कहा मैंने 
कुछ सुना तुमने 
एक राज़ फिर छिपा
यूँ चल पड़ी थी तुम,
पुरानी आदत है
कुछ मेरी चाहत है,
रुक जाओ
रुक भी जाओ
रुक जाओ  

2 comments:

  1. I love the flow in your writing. :)

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  2. Tell her before she finds someone else. :)

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